पश्चिम एशिया संघर्ष पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस संघर्ष में अब तक 22 भारतीय नागरिकों की मौत हुई है, जिनमें 14 नाविक शामिल हैं। उन्होंने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में रह रहे भारतीय समुदाय की सुरक्षा और कुशलक्षेम सुनिश्चित करने के लिए भारत उनके लगातार संपर्क में है। श्री जायसवाल ने बताया कि सऊदी अरब में तीन भारतीयों की भी जान गई है।
विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर 30 और 31 अक्तूबर को अमरीका के अटलांटा में आयोजित जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होंगे। आज दोपहर नई दिल्ली में संवाददाताओं को जानकारी देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि सम्मेलन से इतर विदेश मंत्री क्वाड समूह के विदेश मंत्रियों के साथ बैठक करेंगे। श्री जयशंकर इस दौरान कई द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे। श्री जायसवाल ने बताया कि विदेश मंत्री अटलांटा से सेंट जॉन्स, एंटीगुआ और बारबुडा की यात्रा पर जाएंगे। जहां वे 1 से 4 नवंबर तक आयोजित होने वाली राष्ट्रमंडल राष्ट्राध्यक्षों की बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। आगामी राष्ट्राध्यक्षों की बैठक का विषय है समृद्ध राष्ट्रमंडल के लिए साझेदारी और निवेश को गति देना।
पेरिस में जारी वित्तीय कार्रवाई कार्यबल-एफएटीएफ की बैठक पर श्री जायसवाल ने कहा है कि आतंकवाद के वित्तपोषण और सीमा पार आतंकवाद पर भारत का रुख स्पष्ट है और इसके लिए जवाबदेही तय की जानी चाहिए। श्री जायसवाल ने कहा कि दुनिया को आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों के खिलाफ अधिक प्रभावी कार्रवाई करनी होगी, ताकि वैश्विक समुदाय मिलकर इससे निपट सके।
ऊर्जा की खरीद पर प्रवक्ता ने कहा कि यह राष्ट्रीय हित पर आधारित होती है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा खरीदने का निर्णय कंपनियां लेती हैं। इसमें उस समय उपलब्ध व्यावसायिक परिस्थितियों, बाजार की स्थिति और वैश्विक हालात को ध्यान में रखा जाता है।
शंघाई सहयोग संगठन-एससीओ के सभ्यतागत संवाद मंच की बैठक के विषय में श्री जायसवाल ने कहा कि परंपरा के अनुरूप भारत ने संगठन के सभी सदस्य देशों को आमंत्रित किया है। इसके अलावा, संगठन के संवाद साझेदारों और एक पर्यवेक्षक को भी बुलाया गया है। यह बैठक नई दिल्ली में 20 से 22 नवंबर तक होगी।
पूर्वोत्तर और जापान के बीच सहयोग पर श्री जायसवाल ने कहा कि भारत और जापान के बीच मजबूत साझेदारी है। पूर्वोत्तर भारत और जापान को जोड़ने के लिए कई पहल की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि भारत इन संबंधों को और आगे बढ़ाना चाहता है। भारत-जापान के आर्थिक और प्रौद्योगिकी सहयोग को मजबूत करने के लिए काम जारी है और इस व्यापक साझेदारी के अंतर्गत पूर्वोत्तर भारत पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।